dahej mukt mithila

(एकमात्र संकल्‍प ध्‍यान मे-मिथिला राज्‍य हो संविधान मे) अप्पन गाम घरक ढंग ,अप्पन रहन - सहन के संग,अप्पन गाम-अप्पन बात में अपनेक सब के स्वागत अछि!अपन गाम -अपन घरअप्पन ज्ञान आ अप्पन संस्कारक सँग किछु कहबाक एकटा छोटछिन प्रयास अछि! हरेक मिथिला वाशी ईहा कहैत अछि... छी मैथिल मिथिला करे शंतान, जत्य रही ओ छी मिथिले धाम, याद रखु बस अप्पन गाम - अप्पन बात ,अप्पन मान " जय मैथिल जय मिथिला धाम" "स्वर्ग सं सुन्दर अपन गाम" E-mail: apangaamghar@gmail.com,madankumarthakur@gmail.com mo-9312460150

गुरुवार, 22 सितंबर 2016

पितृ तर्पण

तर्पण मन्त्र -TARPAN MANTRAS

आवाहन: दोनों हाथों की अनामिका (छोटी तथा बड़ी उँगलियों के बीच की उंगली) में कुश (एक प्रकार की घास) की पवित्री (उंगली में लपेटकर दोनों सिरे ऐंठकर अंगूठी की तरह छल्ला) पहनकर, बाएं कंधे पर सफेद वस्त्र डालकर  दोनों हाथ जोड़कर अपने पूर्वजों को निम्न मन्त्र से आमंत्रित करें 

'ॐ आगच्छन्तु मे पितर एवं ग्रहन्तु जलान्जलिम'  
ॐ हे पितरों! पधारिये तथा जलांजलि ग्रहण कीजिए।  

तर्पण: जल अर्पित करें 
निम्न में से प्रत्येक को 3 बार किसी पवित्र नदी, तालाब, झील या अन्य स्रोत (गंगा / नर्मदा जल पवित्रतम माने गए हैं) के शुद्ध जल में थोडा सा दूध, तिल तथा जावा मिला कर जलांजलि अर्पित करें। 

पिता हेतु  --

(गोत्र नाम) गोत्रे अस्मतपिता पिता का नाम शर्मा वसुरूपस्त्तृप्यतमिदं तिलोदकम (गंगा/नर्मदा जलं वा) तस्मै स्वधा नमः, तस्मै स्वधा नमः तस्मै स्वधा नमः।
------. गोत्र के मेरे पिता श्री वसुरूप में तिल तथा पवित्र जल ग्रहण कर तृप्त हों।  
तस्मै स्वधा नमः तस्मै स्वधा नमः तस्मै स्वधा नमः।

उक्त में अस्मत्पिता के स्थान पर अस्मत्पितामह पढ़ें  --

पिता के नाम के स्थान पर पितामां का नाम लें ----
माता हेतु  तर्पण  - 
(गोत्र नाम) गोत्रे अस्मन्माता माता का नाम देवी वसुरूपास्त्तृप्यतमिदं तिलोदकम (गंगा/नर्मदा जलं वा) 
तस्मै स्वधा नमः, तस्मै स्वधा नमः तस्मै स्वधा नमः।
 ........... गोत्र की मेरी माता श्रीमती ....... देवी वसुरूप में तिल तथा पवित्र जल ग्रहण कर तृप्त हों। तस्मै स्वधा नमः तस्मै स्वधा नमः तस्मै स्वधा नमः। 
निस्संदेह मन्त्र श्रद्धा अभिव्यक्ति का श्रेष्ठ माध्यम हैं किन्तु भावना, सम्मान तथा अनुभूति अन्यतम हैं।

जलांजलि पूर्व दिशा में 16 बार, उत्तर दिशा में 7 बार तथा दक्षिण दिशा में 14 बार अर्पित करें 

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संक्षिप्त पितृ तर्पण विधि:
 पितरोंका तर्पण करनेके पूर्व इस मन्त्र से हाथ जोडकर प्रथम उनका आवाहन करे -
ॐ आगच्छन्तु मे पितर इमं गृह्णन्तु जलान्जलिम ।

अब तिलके साथ तीन-तीन जलान्जलियां दें -
(पिता के लिये)
अमुकगोत्रः अस्मत्पिता अमुक (नाम) शर्मा वसुरूपस्तृप्यतामिदं तिलोदकं (गंगाजलं वा) तस्मै स्वधा नमः, तस्मै स्वधा नमः, तस्मै स्वधा नमः ।
(माता के लिये)
अमुकगोत्रा अस्मन्माता अमुकी (नाम) देवी वसुरूपा तृप्यतामिदं तिलोदकं तस्यै स्वधा नमः, तस्यै स्वधा नमः, तस्यै स्वधा नमः ।
जलांजलि पूर्व दिशा में 16 बार, उत्तर दिशा में 7 बार तथा दक्षिण दिशा में 14 बार अर्पित करें 

सोमवार, 22 अगस्त 2016

आखिर मिथिला राज्य कियैक , एक नजर देल जाओ

आखिर मिथिला राज्य कियैक , एक नजर देल जाओ 
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मिथिला राज्य पर चर्चा करय छी त बहुत लोक पुछि दैत छथि कि मिथिला राज्य बनने की फायदा होयत । हमर प्रथम उत्तर रहैत अछि जे हम मिथिला राज्य अपन कोनो फायदा लेल नहि चाहि रहल छी, अपन पहचान "हम मैथिल छी".... हासिल करय लेल चाहि रहल छी कियैकि हम अपना के बिहारी कहबेनाई में शर्म महसूस करय छी । 
.किछु बिंदु पर ध्यान आकर्षित करय चाहब जे मिथिला राज्य बनने की की भय सकैत अछि:-
.1. सबसँ पहिले एकटा अपन राजधानी बनत जतय सँ मिथिलाक लोक, मिथिलाक समस्याक समाधान हेतु काज करता ।
.2. कम सँ कम एकटा हवाई अड्डा भेटत मिथिला में आ एकरा दू, आ फेर चारि करयलेल ककरो लग भीख नहि मांगय पड़त।
.3. हमहूं सब राजधानी, शताब्दी आ दूरन्तो ट्रेन सँ गाम आबि सकब । मजदूर जकां जनसाधारण आ मेल में ठुँसाकय नहि आबय पड़त सदखनि ।
4. देश के हर राज्य में एकटा मिथिला भवन आधिकारिक रूप सँ बनत आ हम सब मैथिल के रुप में पहचानल जायब। मिथिला भवन वा मैथिल सबलेल एकटा भवन लेल सबठाम सरकार के आगूपाछू नहि करय पड़त ।
.5. कम सँ कम एकटा केन्द्रीय विश्वविद्यालय भेटत मिथिला के......विद्यालय आ विश्वविद्यालय के त गिनती नहि कतेक.. अपन शिक्षा आ ज्ञान लेल विश्वविख्यात मिथिला एकबेर पुन: विश्व में अपन परचम लहराओत.
.6. बाढ़ि, आगि, रौदीक सब समस्या लेल मैथिल अपना हिसाब सँ कानून आ समाधान ताकि सकता । अपन मिथिला छ महीना बाढ़ि में, तीन महीना रौदी में रहलाक बावजूद भुखल ककरो नहि मरय दैत अछि, ई Management दुनिया लेल एकटा आविष्कार सिद्ध भय सकैत अछि । हजारों तरहक लघु, मध्यम आ उच्च उद्योग सँ लाखों रोजगार उपलब्ध भय सकत मिथिला में.....
.7. हम सब अपन भाषा "मैथिली" में पढ़ि सकब आ शान सँ मैथिलीके राजभाषा लिख सकब। मैथिली में हजारों लोक के रोजगार भेटत आ देश के हर विश्वविद्यालय में एकटा भाषा मैथिली सेहो जोड़ल जायत ।
.8. देश में सब जगह केवल मैथिली अकादमी बना सकब।मैथिली भाषा आ साहित्य के अपन स्थान भेटत वैश्विक मानचित्र पर.... भोजपुरी, मगही साथे नहि रहय पड़त मैथिली के।
.9. पर्यटन आ एतिहासिक धरोहर के संरक्षण लेल हर तरह सँ निर्णय लेबय लेल स्वतंत्र रहब हम मैथिल , अपन मिथिला राज्य बनलापर।
.10. एखन पूरा मिथिला में मात्र 30% मैथिल विभिन्न सरकारी पद पर छथि, अपन अलग राज्य बनलापर 80% मैथिल विभिन्न सरकारी वा गैरसरकारी पद पर रोजगार प्राप्त करता।
.11. सबसँ पैघ बात जहिपर लोक के आश्चर्य लगैत अछि , लोक पुछय छथि कि मिथिला राज्य बनियो गेल त चलत कोना .....ओकर जवाब......एकटा समय रहय जहिया जवाहर लाल नेहरु नंगटे भागैत रहथि......हमहीं मैथिल रही जे हुनका धोती देने रही...। आगा जाकय ओ देश चला लेला.....त हमसब अपन मिथिला नि:संदेह चलायब आ एकटा मिसाल बनब देश के बाकी राज्य लेल।
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जय मिथिला
जय जय मैथिल
www.maithilmanch.com


सोमवार, 8 अगस्त 2016

मिथिला राज्य पर राजनैतिक चेतना

उमाकांत झा  बक्शी 
Uma Kant Jha Bakshi
  मिथिला राज्य पर राजनैतिक चेतना 
 मिथिला राज्य अभियान के आई काल्हि फेस बूक वाट्स पर धूम मचल अछि। धूम प्रवासी मैथिल द्वारा एना लगैत अछि जे मिथिला मे जवरदस्त आन्दोलन चलि रहल अछि। परन्तु मिथिला मे मिथिला राज्य पर राजनैतिक चेतना मिथिलाबाद के सशक्तिकरण शून्य के बराबर अछि। दिल्ली के जंतर मंतर पर अनेकों बेर किछु महामहीम द्वारा अनशन पर बैसब धरना देब आम बात अछि। कियो निर्णय लेलन्हि 10 -- 20 व्यक्ति जमा भेला फोटो भेल अखरबाला के लीखिक जे देलखिन्ह छपि गेल सिलसिला बर्षो बरख सँ चलि रहल अछि। सत्ता चाहे केन्द्र हो बा राज्य ओकरा पर एकर कोनो असर नहि पड़ि रहल अछि। अनेको एहेन संगठन अछि जे कतहू 50 सो व्यक्ति आंदोलन के लेल नहि जूटा सकैत अछि से दाबा करैत अछि हमरा सब लोक संग आबय , तन मन धन सँ सहयोग करय हम मिथिला राज्य निर्माण करब। ईमहर मिथिलाबासी अपन दैनिक समस्या के निदान मे कियो एहि नेता के पॉछॉ कियो ओई नेता के पॉछॉ लागल आपस मे तूतू मै मै बतकुट्टनि करैत समय नष्ट करैत अछि। एहि विकट परिस्थिति मे राजनैतिक चेतना मिथिला राज्य के लेल मिथिला विकास के लेल मिथिला समागम के आयोजन दरभंगा मे कयल जा रहल अछि। समागम मे सहभागिता लेल तैयारी चलि रहल अछि। जल्द सँ जल्द मिथिला समागम होयत।एहि समागम मे पारित होमय बाला ड्राफ्ट प्रस्ताब बनल अछि जकर फाईनल एक कोर कमीटी करत जकर गठन कयल जाएत। ड्राफ्ट प्रस्ताव निम्न लिखित अछि ----
मिथिला समागम के प्रस्ताव ---

1 )
मिथिला समागम वर्तमान बिहार के 24 जिला झारखंड के 6 जिला कुल 30 जिला के मिथिला राज्य घोषित करैत अछि।
2 }
समागम कोनो संस्था नहि एक मंच मंचे रहत नव संस्था नहि बनत मंच सब मिथिला मैथिल संगठन के एक सूत्र मे बांधि मिथिला राज्य अभियान के लेल जन चेतना करत।
) मिथिला समागम ओहि दलक नेता के जे मिथिला राज्य के अपन घोषणा पत्र मे स्वीकार नहि करत तकर नेता के वहिष्कार करत
) मिथिला समागम एहेन नेता के चाहे विधायक, सांसद, मंन्त्री या प्रधानमंत्री हो जकर पार्टीक घोषणा पत्र मे मिथिला राज्य नहि, मिथिला राज्य अभियानी ओकर मिथिला मैथिल मंच पर सम्मानित नहि करत। 
5 )
मिथिला समागम अपन सभ कार्यक्रम मिथिले के पावन भूमि पर करत।
6 )
मिथिला राज्य अभियान मीडिया ,फोटो , अखबार ,पम्प सो लेल व्यग्र नहीं रहत।, आंदोलन के ओहि स्तर तक ले जायत की मीडिया ओकरा नजरअंदाज नहि कय सकय। 
7 )
जेना देश को आज़ादी लेल " अंग्रेजों भारत छोड़ो " नारा देल गेल तहिना "मिथिला राज्य विरोधी नेता मिथिला छोड़ू " नारा लगायत। 
8 )
मिथिला समागम सब कार्यक्रम दरी सतरंजी या खुला मैदान मे सादगी होयत जतय कम कम खर्च हो।आ समागम चन्दा धंधा नहि करत। 
9 )
मिथिला समागम में शामिल सब संगठन अपना के मज़बूत करत ,जनता सँ जूड़त आ मिथिला राज्य अभियान के लोकप्रिय बनाओत। 
10 समागम जाति धर्म मज़हबी भाषायी उन्माद सँ मिथिला के मुक्त करक लेल जनचेतना अभियान करत आ मिथिलाबासी एकता मिथिलाबाद स्थापित करत। 
11 ) समागम अंगिका , बज्जिका , जुलाही और अन्य बोली जे मिथिलाके तीसो जिला मे बाजल जाइत अछि से मैथिलि अछि ,एकरा स्वीकार करैत अछि। तथा मैथिली साहित्य अकादमी मे एहि सब पोथि के मैथिली के पुस्तक मानल जाय।